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Hasya: काका हाथरसी की हास्य-व्यंग्य से भरपूर तीन चुनिंदा कविताएं

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    1- 

भोंदूमल बेकार थे, हुआ पिलपिला हाल।
फ़ाक़े होने लगे तब, पहुँच गए ससुराल॥
पहुँच गए ससुराल, बीस दिन करो चराई।
पाँच किलो बढ़ गया वज़न, आई चिकनाई॥
घर आए तो देखा, छह मेहमान डट रहे।
उनके दर्शन करते ही, छ...और पढ़ें
15 hours ago

श्रीकांत वर्मा की कविता- कुछ का व्यवहार बदल गया, कुछ का नहीं बदला

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कुछ का व्यवहार बदल गया। कुछ का नहीं
बदला।
जिनसे उम्मीद थी, नहीं बदलेगा
उनका बदल गया।
जिनसे आशंका थी,
नहीं बदला।
जिन्हें कोयला मानता था
हीरों की तरह
चमक उठे।
जिन्हें हीरा मानता था
क...और पढ़ें
17 hours ago

शहरयार: बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

घर की ता'मीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फ...और पढ़ें
21 hours ago

राजेन्द्र कृष्ण: उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते
अपनी तो ये आदत है कि हम कुछ नहीं कहते

मजबूर बहुत करता है ये दिल तो ज़बाँ को
कुछ ऐसी ही हालत है कि हम कुछ नहीं कहते

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते
द...और पढ़ें
23 hours ago

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता, सुनना चाहता हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    
अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता,
सुनना चाहता हूँ
एक समर्थ सच्ची आवाज़
यदि कहीं हो।

अन्यथा
इससे पूर्व कि
मेरा हर कथन
हर मंथन
हर अभिव्यक्ति
शून्य से टकराकर फिर वापस लौट आए,
...और पढ़ें
21 hours ago

आज का शब्द: खड्ग और विमल राजस्थानी की कविता- धरती को स्वर्ग बना मानव !

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
                                                                
                                                    'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- खड्ग, जिसका अर्थ है- एक प्रकार की तलवार, खाँड़ा। प्रस्तुत है विमल राजस्थानी की कविता- धरती को श्वर्ग बना मानव ! 

धरती को स्वर्ग बना मानव !
तू मुक्ति-मोक्ष की बात न कर
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17 hours ago

आज का विचार: श्रीकांत वर्मा

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
                                                                
                                                    जब तक प्रश्न है, तभी तक साहित्य है।
- श्रीकांत वर्मा 
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15 hours ago

मोहसिन नक़वी: फिर वही मैं हूँ वही शहर-बदर सन्नाटा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
फिर वही मैं हूँ वही शहर-बदर सन्नाटा
मुझ को डस ले न कहीं ख़ाक-बसर सन्नाटा

दश्त-ए-हस्ती में शब-ए-ग़म की सहर करने को
हिज्र वालों ने लिया रख़्त-ए-सफ़र सन्नाटा

किस से पूछूँ कि कहाँ है मिरा रोने वाला...और पढ़ें
23 hours ago

कविता और साहित्य की हर हलचल आपके मोबाइल पर, जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से

काव्य डेस्क

Halchal
                                                                
                                                    साहित्य, कविता और शायरी की दुनिया में होने वाली हर खास हलचल अब आपके मोबाइल पर सीधे पहुँचेगी। अमर उजाला काव्य ने पाठकों और साहित्यप्रेमियों के लिए अपना व्हाट्सएप चैनल शुरू किया है। इस चैनल से जुड़कर आप कविताओं, शायरी, साहित्यिक खबरों, चर्चित रचनाकारों...और पढ़ें
                                                
18 hours ago

Urdu Poetry: हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली...और पढ़ें
                                                
1 hour ago
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Jagdish chandra

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