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आज का शब्द: दीपशिखा और प्रेमलता त्रिपाठी की कविता- लौ कंपन

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
                                                                
                                                    'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दीपशिखा, जिसका अर्थ है- दीए की लौ। प्रस्तुत है प्रेमलता त्रिपाठी की कविता- लौ कंपन

विहँस विहँस मनभावन,जलती दीपशिखा ।
सिहर सिहर लौ कंपन, करती दीपशिखा ।

टिम टिम...और पढ़ें
10 hours ago

फिर बताओ इस सबका ज़िम्मेदार कौन है..?

Std Maurya

Mere Alfaz
                                                                
                                                    कहो तुम, मैं अंधा-बहरा हूँ
उन्होंने तुम्हें बाँटा और तुम बंट गए,
उन्होंने तुम्हें जाति के बंधन में बाँधा, तुम बंध गए..
जाति के आधार पर काम दिया, तुम करने लगे..
उन्होंने हल चलवाए, तुम चलाए,
नाली साफ़ कराए, तुम किए...और पढ़ें
12 hours ago

Happy Diwali 2026: शिवमंगल सिंह ‘सुमन’की कविता- मृत्तिका दीप

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेष
एक भी कण स्नेह का जब तक रहेगा शेष।

हाय जी भर देख लेने दो मुझे
मत आँख मीचो
और उकसाते रहो बाती
न अपने हाथ खींचो
प्रात जीवन का दिखा दो
फिर मुझे चाहे बुझा दो...और पढ़ें
10 hours ago

अर्पित शर्मा अर्पित की ग़ज़ल: है जैसे रोज़ दीवाली सी दुनिया दुनिया वालों की

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    है जैसे रोज़ दीवाली सी दुनिया दुनिया वालों की
हमें भी चार दिन की ज़िंदगी मिलती उजालों की

जुदा ग़म है जुदा ख़ुशियाँ जुदा दिन है जुदा रातें
ये दुनिया ही निराली है मोहब्बत करने वालों की

ज़माना ख़ूबसूरत है ज़मा...और पढ़ें
10 hours ago

अतुल कनक की कविता- अँधेरे के विरुद्ध

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कितनी ही गहरी हो अमावस
थरथरा जाती है आख़िर
दीवार पर प्रकाशित होते ही एक दीपक

रचने वाले रच लें अनगिनत प्रपंच,
मारीच की माया कभी नहीं रच सकेगी
अंतिम जीत की छवियाँ
सत् का साथी आएगा जब अपनी पर
छिन्न...और पढ़ें
10 hours ago

जैसे गंगा गायत्री गीता सा बनाए

देवसुधा पत्रिका

Mere Alfaz
                                                                
                                                    गोपाष्टमी भारत का महान पर्व
गोवर्धन गाय बछड़े का महत्व ,
शास्त्रानुसार पंचोपचार पूजन
करे मनोकामनाओं का पूर्णत्व।
अष्टमी को मिले श्यामा गाय
मानव का अहो सौभाग्य है,
भारत भारतीयता का गौरव
गायपूजन जीवन का...और पढ़ें
12 hours ago

है कोई आसमान झुकाना भी है मुझे

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                                                
                                                    तेरा खयाल दिल से भुलाना भी है मुझे
यानी की अपना जख्म छुपाना भी है मुझे
मेरी वजह से जितना ये मंजर उदास है
खुद हंसना है और इसको हंसाना भी है मुझे
ये दिल हुआ भारी,फकत तेरे खयाल से
है और कितना बोझ उठाना भी है मुझे
...और पढ़ें
12 hours ago

हर शाम मुझे ऐसा लगता है...

User

Mere Alfaz
                                                                
                                                    जिस नाम से तुम अपनी पत्नी को पुकारते थे—
मैं भी कभी उसे ठीक उसी नाम से पुकारा करता था।

तुम्हारी पुकार में जितनी आत्मीयता थी,
मेरी अपनी आशाएँ, विश्वास और आकांक्षाएँ भी
उससे कुछ कम गहरी नहीं थीं l

फिर...और पढ़ें
14 hours ago

नशे के मौसम में बहक जाने

Dn Chaubey

Mere Alfaz
                                                                
                                                    आज कुछ खुमारी मौसम का है, कुछ नशा तुम्हारी भी है,
नशे के मौसम में बहक जाने का मन करता कभी कभी मेरा भी...और पढ़ें
13 hours ago

मन पे छाया है तेरा ही नशा।

Umesh Mishra

Mere Alfaz
                                                                
                                                    दिल में आशा जगी, वंदना हो गई,
तेरा अस्तित्व ही मेरा चमन हो गया।
तेरे चरणों में जब से झुका ये हृदय,
मेरा जीवन तुझे ही समर्पित हो गया।

स्वप्न देखा तो कदम आगे बढ़ने लगे,
नैन तकते रहे, तेरे दर्शन जब हुए।
...और पढ़ें
12 hours ago
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धरा का अंधेरा दिवाकर की तरह..

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                                                
                                                    अंतरात्मा में हौसलों का दीप
जलते रहना चाहिए।
धरा का अंधेरा दिवाकर की तरह
हमें मिटाना चाहिए।।

-ममता तिवारी...और पढ़ें
13 hours ago

रिश्ते बनाने से बेहद तंग आ गई 'उपदेश'।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                                                
                                                    रिश्ते बनाने से बेहद तंग आ गई 'उपदेश'।
अब तो शेष रिश्ते निभाने की दिल में लगी।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 ...और पढ़ें
14 hours ago

कह दो, कौन सा भाव है , जो मैं मौन रहकर नहीं जगाती

sweta sarvate

Mere Alfaz
                                                                
                                                    अगर कलम बोल पाती तो
सर्वप्रथम मुझको वो हड़काती
क्यों दबा रखी सीने में आग
नहीं क्यों? काग़ज़ पर मुझे चलाती।

फिर शायद कहती, बड़बोलों की इस दुनिया में
मैं ठीक ही ख़ामोश रही
बातों की लफ़्फ़ाज़ी से
...और पढ़ें
14 hours ago

कोई पूछे अगर सुकून का पता मुझसे

Aparajit Nandi

Mere Alfaz
                                                                
                                                    रिश्तों को बेड़ियां, प्रेम को पाखंड, सुख को भ्रम,
और दुःख को अंतिम सत्य लिखूँगा।
जहाँ हर एक वादा सिर्फ एक समझौता हो,
मैं उस हर कसमें को कोरा कागज़ लिखूँगा।
भीड़ से घिरे होने पर भी जो भीतर तक चीखती हो,
मैं उस खामोशी क...और पढ़ें
14 hours ago

तेरे दर में अनजान हूं मैं।

Gurdeep Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    तेरे दर में अनजान हूं मैं।
तेरे दर में परेशान हूं मैं।

बिन बुलाए आ जाता हूं।
तेरे दर में फरमान हूं मैं।

कोई नहीं जानता मुझे।
तेरे दर में हलकान हूं मैं।

सिर्फ तुझे ही देखना है।
त...और पढ़ें
14 hours ago

क्योंकि थोड़ा तो वक्त लगता है सफलता को गले लगाने में ।।

Kshitij Prakash

Mere Alfaz
                                                                
                                                    उलझनों की दुनिया से निकलने पर,
नयी राहों की खोज पे निकलने पर,
कई सारे बंधनों को छोड़कर ,
व्यक्ति पहुंचता है एक नए शहर के छोर पर I
अपने शहर की गलियों को भुला कर,
नए शहर की गलियों में भटककर ,
नयी राहें बनाता है...और पढ़ें
14 hours ago

डूब कर जिसमें नई राह नज़र आई है

Rakhi Alp

Mere Alfaz
                                                                
                                                    डूब कर जिसमें नई राह नज़र आई है।
कुछ नहीं है ये तेरे प्यार की गहराई है।

वो भी मुझको न समझ पाया जो ये कहता था,
तू कोई ग़ैर नहीं है मेरी परछाई है।

जिससे गलती किसी को अपनी नज़र आ जाए,
ऐसी ऐनक अभी दुनिया...और पढ़ें
13 hours ago

गर ख़्वाहिश ना होती तो कब का मर गया होता।।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                                                
                                                    गर ख़्वाहिश ना होती तो कब का मर गया होता।।
ना यूँ फिरता आवारा सा कब का घर गया होता।।
सुना था ज़िंदगी में शब ए चाँद का होना ज़रूरी है,
अगर हिस्से में ना आता तो कब का डर गया होता
मेरे बारे में जो सोचो मगर हक़ीकत तो यही है बस...और पढ़ें
13 hours ago

चुप रह कर इज़हार किया मैंने आप से

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                                                
                                                    हमीं से ही रुसवा कर दिल मेरा जलाया आपने मगर मेरा कसूर है क्या ये तो कभी नहीं बताया आपने
सच तो ये है आग नफरत की जलाया है आपने मगर कभी मेरा नीयत ए शौक नहीं आजमाया आपने
मुकर कर मुझसे हाल ए दिल भी दिल जलाया है आपने मगर चिराग ए मोहब्बत नहीं...और पढ़ें
13 hours ago

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल

Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                                                
                                                    भारत के चरणों में से निकली जो गंगा की धारा है,
उसी मिट्टी से बने दीप ने दीप्त किया जग सारा है।

किया दीप्त जग सारा है हर्षित भारत हमारा है,
लौह पुरुष का गुणगान करता आज राष्ट्र सारा है।।

पूरब से पश्चिम उत्तर...और पढ़ें
14 hours ago

विशेष

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Prasoon Saxena

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Dn Chaubey

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