हिन्द देश की शान है हिन्दी
भारत मां की जान है हिन्दी
भाषाओं की रानी है
सबने सच यह जानी है।
देश की यह जन भाषा है
हर भाषा की आशा है
क्यों केवल ये राज की भाषा है
है जबकि कई कोटि की भाषा।
राष्ट्र की...और पढ़ें
आधी रात से चाँद तक
आधी रात के मौन गगन में,
आजादी का स्वर लहराया।
बिखरे मोती रियासतों के,
एक मुकुट में देश सजाया।
हमने अपने हाथों मिलकर,
अपना संविधान बनाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भा...और पढ़ें
एक अधूरा सच,
जो आंखे देखती रही
और अंतःकरण,
रोता रहा।
जी कर ,
अधूरी जिंदगानी,
मन कही,
खोता रहा।
टूटती रही,
रिश्तों की बाते,
मन सोच अपनो को,
दर्द सहता रहा।...और पढ़ें
दिल कितना नाजुक-सा है,बिन छुए टूट जाता है,
शब्द भले ही पत्थर न हों,फिर भी चोट लगाता है।
मीठे बोलों की फुहारों से,पल में भावुक हो जाता है,
प्रेम भरे दो शब्द को सुन,सूना मन भी मुस्काता है।
कटु शब्दों के तीखे वार से,म...और पढ़ें
तमसा तट पर बाण चला तो, क्रौंच-विहग का स्वर अकुलाया,
करुण पुकार सुनी वाल्मीकि ने, ऋषि का अंतर भर आया।
पीड़ा ने जब छंद सँवारा, प्रथम श्लोक साकार हुआ,
शोक ढला जब श्लोक रूप में, रामायण का दीप जलाया।
एक पक्षी की पीड़ा ने भी, मा...और पढ़ें
तुझे सवाल कहूं या फिर जवाब कहूं,
तुझे हकीकत कहूं या फिर ख्वाब कहूं,
सचमुच तू मेरे अंदर भी है बाहर भी है,
तुझे एक नशा कहूं या फिर शराब कहूं|
-मनस्व...और पढ़ें
तुम बनो सूरज की वह प्रतिमा,
तुम्हारे चेहरे पर दिखना चाहिए सदा लालिमा।
उस लालिमा में एक ऐसी हो अनल,
जिसे देख तुम्हारे दुश्मन की धड़कन उठे मचल।
तुम अपनी मेहनत की चाबी से खोल देना अपनी किस्मत का ताला,
ह...और पढ़ें
तुम जो थे तो सब संभल गए,
तुम गए और हम बिखर गए।।
वो तड़पता रहा रातभर जाग कर,
तुम अहले सुबह उठे और रूखसत हो गए।।
सारी उम्र बेवजह भटकता वो रहा,
फिर एक मकान मिला और किरदार बदल गए।।
कहते रह...और पढ़ें
नास्तिक की आख़िरी दलील
सब कहते हैं—
“नास्तिक प्रेम में पड़ तो गया,
अब अपनी महबूबा को माँगेगा किससे?
जिस ईश्वर को उम्रभर नकारता रहा,
उसी के दर पर जाकर सिर झुकाएगा क्या?”
मैं मुस्कुराया।
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जो न माना मानव तू तो पीछे फिर पछताएगा
तेरा करा धरा ही सब कुछ तेरे सामने आएगा।
मेरी इस पावन धरती को धुआँ धुँआ ही कर डाला
ईंधन और बारूद से मेरा सीना चाक ही कर डाला।
ज़हरीली गैसों से मेरा गला घूँटता जाता है
क्यूँ मानव...और पढ़ें