विज्ञापन

कविता

736 Followers 3401 Poems

Happy Diwali 2026: शिवमंगल सिंह ‘सुमन’की कविता- मृत्तिका दीप

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेष
एक भी कण स्नेह का जब तक रहेगा शेष।

हाय जी भर देख लेने दो मुझे
मत आँख मीचो
और उकसाते रहो बाती
न अपने हाथ खींचो
प्रात जीवन का दिखा दो
फिर मुझे चाहे बुझा दो...और पढ़ें
10 hours ago

अतुल कनक की कविता- अँधेरे के विरुद्ध

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कितनी ही गहरी हो अमावस
थरथरा जाती है आख़िर
दीवार पर प्रकाशित होते ही एक दीपक

रचने वाले रच लें अनगिनत प्रपंच,
मारीच की माया कभी नहीं रच सकेगी
अंतिम जीत की छवियाँ
सत् का साथी आएगा जब अपनी पर
छिन्न...और पढ़ें
10 hours ago
विज्ञापन

चन्द्रकान्त देवताले: हर कुछ कभी न कभी सुन्दर हो जाता है

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    हर कुछ कभी न कभी सुन्दर हो जाता है
बसन्त और हमारे बीच अब बेमाप फासला है
तुम पतझड़ के उस पेड़ की तरह सुन्दर हो
जो बिना पछतावे के
पत्तियों को विदा कर चुका है

थकी हुई और पस्त चीजों के बीच
पानी की आवाज जि...और पढ़ें
14 hours ago

तुम्हारी तृप्ति यदि मेरे हृदय की प्यास हो जाये: बलबीर सिंह 'रंग'

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    तुम्हारी तृप्ति यदि मेरे हृदय की प्यास हो जाये
उसी क्षण से मुझे जीवन सरस मधुमास हो जाये।

अभी तो पल रहे हैं विकल आँसू करुण गानों में,
अभी तो एक मीठी सी कसक उठती है प्राणों में,
बहुत संभव है कि कल यह प्यार का इतिहास...और पढ़ें
1 day ago
विज्ञापन

दुष्यंत कुमार की कविता- अब अंतर में अवसाद नहीं

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    अब अंतर में अवसाद नहीं
चापल्य नहीं उन्माद नहीं
सूना-सूना सा जीवन है
कुछ शोक नहीं आल्हाद नहीं

तव स्वागत हित हिलता रहता
अंतरवीणा का तार प्रिये ..

इच्छाएँ मुझको लूट चुकी
आशाएं मुझसे छूट चु...और पढ़ें
1 day ago

नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता- तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल!

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    घोर निर्जन में परिस्थिति ने दिया है डाल!
याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल!
कौन है वह व्यक्ति जिसको चाहिए न समाज?
कौन है वह एक जिसको नहीं पड़ता दूसरे से काज?
चाहिए किसको नहीं सहयोग?
चाहिए किसको नहीं सहवास?
...और पढ़ें
2 days ago

नागार्जुन: नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    
नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है
यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है
मेरी भी आभा है इसमें

भीनी-भीनी खुशबू वाले
रंग-बिरंगे
यह जो इतने फूल खिले हैं
कल इनको मेरे प्राणों ने नहलाया था
कल इनको...और पढ़ें
2 days ago

Hindi Geet: बेसुध कर जाती हैं सुधियाँ, चेतन कर जाती मदहोशी

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    तू है जहाँ, वहाँ आ पाना
तन के वश की बात नहीं है,
इस तन से नाता टूटे तो
तुझसे मिलना हो सकता है!

आँखों में तैरती उदासी, लहराती आँसू की छाया,
ऐसा लगे, कि मेरी काया में तेरी उतरी है तेरी काया;
दर्पण ने इस...और पढ़ें
4 days ago

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’की कविता- मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।

चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
6 days ago

गीत चतुर्वेदी: मैं जागता हूँ देर तक कई बार सुबह तक

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं जागता हूँ देर तक
कई बार सुबह तक
कमरे में करता हूं चहलक़दमी
फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि
जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है
कोई सुनता है और उसकी लय पर सोता है
मेरी जाग से किसी को मिलती है सुकून की नींद...और पढ़ें
1 week ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7542 कविताएं

View Profile