दाना डाल रहा चिड़ियों को मगर शिकारी है
आग लगाने वाला पानी का व्यापारी है
मछुआरे की नीयत खोटी तब वो समझ सकी
कँटिया में जब हाय फँसी मछली बेचारी है
लोग कबूतर बनकर खाली टुक-टुक ताक़ रहे
उसकी जुमलेबाजी मे...और पढ़ें
मैं गुनहगार अगर हूँ तो सज़ा दी जाए
वर्ना लोगो मुझे फिर दाद-ए-वफ़ा दी जाए
तुम मुझे चाहते हो चाहते हो तो साहिब
क्यों न ये बात ज़माने को बता दी जाए
एक चिंगारी बदल दे कहीं जंगल का मिज़ाज
इस से पहले ही तह...और पढ़ें
सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो
ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
फ़िलहाल इस से बचने का है एक रास्ता
वो ये कि इस से बच के रहो फ...और पढ़ें
दिल की गली में चाँद निकलता रहता है
एक दिया उम्मीद का जलता रहता है
जैसे जैसे यादों कि लौ बढ़ती है
वैसे वैसे जिस्म पिघलता रहता है
सरगोशी को कान तरसते रहते हैं
सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है...और पढ़ें
जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए
अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए
होता नहीं है उस लब-ए-नौ-ख़त पे कोई सब्ज़
ईसा ओ ख़िज़्र क्या सभी यक-बार मर गए
यूँ कानों-कान गुल ने न जाना चमन में आह
सर को...और पढ़ें
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को सँवारोगे तो याद आऊँगा
रंग कैसा हो ये सोचोगे तो याद आऊँगा
जब नया सूट ख़रीदोगे तो याद आऊँगा
भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद...और पढ़ें
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
लोग भी क्या हैं किसी का दिल दुखा कर ख़ुश हुए
फूल पर बैठी हुई तितली उड़ा कर ख़ुश हुए
प्यास हम अपनी बुझा लें ये इजाज़त है कहाँ
फिर भी ऐ दरिया तिरे नज़दीक आकर ख़ुश हुए
मर्ज़ को पाले हुए रखना समझदारी नहीं
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निगाह-ए-नाज़ का इक वार कर के छोड़ दिया
दिल-ए-हरीफ़ को बेदार कर के छोड़ दिया
हुई तो है यूँही तरदीद-ए-अहद-ए-लुत्फ़-ओ-करम
दबी ज़बान से इक़रार कर के छोड़ दिया
छुपे कुछ ऐसे कि ता-ज़ीस्त फिर न आए नज़र
रहीन...और पढ़ें