कभी गोकुल कभी राधा कभी मोहन बन के
मैं ख़यालों में भटकती रही जोगन बन के
हर जनम में मुझे यादों के खिलौने दे के
वो बिछड़ता रहा मुझ से मिरा बचपन बन के
मेरे अंदर कोई तकता रहा रस्ता उस का
मैं हमेशा के लिए...और पढ़ें
सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
वैसे तो हम वही हैं जो पहले थे दोस्तो
हालात जैसे पहले थे वैसे नहीं रहे
ख़ुद मर गया था जिन को बचाने में पहले बाप
अब के फ़साद में वही...और पढ़ें
फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह
शीशागर बैठे रहे ज़िक्र-ए-मसीहा ले कर
और हम टूट गए काँच के प्यालों की तरह
जब भी अंजाम-ए-मोहब्बत ने पुकारा ख़ुद को
वक...और पढ़ें
हर धड़कन हैजानी थी हर ख़ामोशी तूफ़ानी थी
फिर भी मोहब्बत सिर्फ़ मुसलसल मिलने की आसानी थी
जिस दिन उस से बात हुई थी उस दिन भी बे-कैफ़ था मैं
जिस दिन उस का ख़त आया है उस दिन भी वीरानी थी
जब उस ने मुझ से...और पढ़ें
जो शजर सूख गया है वो हरा कैसे हो
मैं पयम्बर तो नहीं मेरा कहा कैसे हो
दिल के हर ज़र्रे पे है नक़्श मोहब्बत उस की
नूर आँखों का है आँखों से जुदा कैसे हो
जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा क्यूँ मानें
और जि...और पढ़ें
कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं
ये किस के हाथ से दामन छुड़ा रहा हूँ मैं
तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं
ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह
तुम्ह...और पढ़ें
जब होती हूँ
पंख
उड़ जाते हो थामकर मुझे
नीले विस्तार में
जब
होती हूँ ख़्वाब
भर लेते हो अपनी आँखों में
जब
होती हूँ बूँद
सागर बन समेट लेते हो
अपने आग़ोश में
जब
होती हूँ...और पढ़ें
हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
इक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं
आँखें ब्लैक-एण्ड-वाइट हैं तो फिर इन में क्यूँ
रंग-बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं
ख़्वाबों की मिट्टी से बने दो कूज़ों में
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किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाए हुए
ज़माना गुज़रा है अपना ख़याल आए हुए
बड़ी अजीब ख़ुशी है ग़म-ए-मोहब्बत भी
हँसी लबों पे मगर दिल पे चोट खाए हुए
हज़ार पर्दे हों पहरे हों या हों दीवारें
रहें...और पढ़ें