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उर्दू अदब

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Urdu Poetry: हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली...और पढ़ें
                                                
3 hours ago

शहरयार: बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी

काव्य डेस्क

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ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

घर की ता'मीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फ...और पढ़ें
22 hours ago
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मोहसिन नक़वी: फिर वही मैं हूँ वही शहर-बदर सन्नाटा

काव्य डेस्क

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फिर वही मैं हूँ वही शहर-बदर सन्नाटा
मुझ को डस ले न कहीं ख़ाक-बसर सन्नाटा

दश्त-ए-हस्ती में शब-ए-ग़म की सहर करने को
हिज्र वालों ने लिया रख़्त-ए-सफ़र सन्नाटा

किस से पूछूँ कि कहाँ है मिरा रोने वाला...और पढ़ें
1 day ago

राजेन्द्र कृष्ण: उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते

काव्य डेस्क

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उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते
अपनी तो ये आदत है कि हम कुछ नहीं कहते

मजबूर बहुत करता है ये दिल तो ज़बाँ को
कुछ ऐसी ही हालत है कि हम कुछ नहीं कहते

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते
द...और पढ़ें
1 day ago
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Urdu Poetry: उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
1 day ago

Urdu Poetry: हर एक दर्द को अपना बना के रक्खा है

काव्य डेस्क

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                                                    हर एक दर्द को अपना बना के रक्खा है
ये अपने आप को कैसा बना के रक्खा है

किसी ने हुस्न से आगे उसे नहीं देखा
सभी ने चाँद का टुकड़ा बना के रक्खा है

बड़े सुकून से वो सो रही है और उस ने
हमारे हाथ को तकिया ब...और पढ़ें
1 day ago

अंबरीन हसीब अंबर की ग़ज़ल: ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी नाँ

काव्य डेस्क

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                                                    ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी नाँ
मुझे मुसलसल देख रहे हो तुम भी नाँ

दे जाते हो मुझ को कितने रंग नए
जैसे पहली बार मिले हो तुम भी नाँ

हर मंज़र में अब हम दोनों होते हैं
मुझ में ऐसे आन बसे हो तुम भी ना...और पढ़ें
1 day ago

Urdu Poetry: मेरी इक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए

काव्य डेस्क

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                                                    मेरी इक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए
बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए

रेत मेरी उम्र मैं बच्चा निराले मेरे खेल
मैं ने दीवारें उठाई हैं गिराने के लिए

वक़्त होंटों से मिरे वो भी खुरच कर ले गया
इक त...और पढ़ें
1 day ago

दाग़ देहलवी: उन का आना नज़र नहीं आता

काव्य डेस्क

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                                                    वो ज़माना नज़र नहीं आता
कुछ ठिकाना नज़र नहीं आता

जान जाती दिखाई देती है
उन का आना नज़र नहीं आता

इश्क़ दर-पर्दा फूँकता है आग
ये जलाना नज़र नहीं आता

इक ज़माना मिरी नज़र में रहा
इक...और पढ़ें
1 day ago

नज़ीर अकबराबादी: सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

काव्य डेस्क

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टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा
क़ज़्ज़ाक़ अजल का लूटे है दिन रात बजा कर नक़्क़ारा
क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या गौनें पल्ला सर-भारा
क्या गेहूँ चावल मोठ मटर क्या आग धुआँ और अँगारा
सब ठाठ पड़ा...और पढ़ें
2 days ago
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Jagdish chandra

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