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उर्दू अदब

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Urdu Poetry: कभी गोकुल कभी राधा कभी मोहन बन के

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    कभी गोकुल कभी राधा कभी मोहन बन के
मैं ख़यालों में भटकती रही जोगन बन के

हर जनम में मुझे यादों के खिलौने दे के
वो बिछड़ता रहा मुझ से मिरा बचपन बन के

मेरे अंदर कोई तकता रहा रस्ता उस का
मैं हमेशा के लिए...और पढ़ें
4 hours ago

नवाज़ देवबंदी की ग़ज़ल: सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे

वैसे तो हम वही हैं जो पहले थे दोस्तो
हालात जैसे पहले थे वैसे नहीं रहे

ख़ुद मर गया था जिन को बचाने में पहले बाप
अब के फ़साद में वही...और पढ़ें
4 hours ago
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सुदर्शन फ़ाकिर: हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह

शीशागर बैठे रहे ज़िक्र-ए-मसीहा ले कर
और हम टूट गए काँच के प्यालों की तरह

जब भी अंजाम-ए-मोहब्बत ने पुकारा ख़ुद को
वक...और पढ़ें
10 hours ago

जौन एलिया: हर धड़कन हैजानी थी हर ख़ामोशी तूफ़ानी थी

काव्य डेस्क

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हर धड़कन हैजानी थी हर ख़ामोशी तूफ़ानी थी
फिर भी मोहब्बत सिर्फ़ मुसलसल मिलने की आसानी थी

जिस दिन उस से बात हुई थी उस दिन भी बे-कैफ़ था मैं
जिस दिन उस का ख़त आया है उस दिन भी वीरानी थी

जब उस ने मुझ से...और पढ़ें
11 hours ago
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Urdu Poetry: मैं न हूँगा तो क्या कमी होगी

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
12 hours ago

शहज़ाद अहमद की ग़ज़ल: उम्र सारी तो अँधेरे में नहीं कट सकती

काव्य डेस्क

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                                                    जो शजर सूख गया है वो हरा कैसे हो
मैं पयम्बर तो नहीं मेरा कहा कैसे हो

दिल के हर ज़र्रे पे है नक़्श मोहब्बत उस की
नूर आँखों का है आँखों से जुदा कैसे हो

जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा क्यूँ मानें
और जि...और पढ़ें
1 day ago

असरार-उल-हक़ मजाज़ की ग़ज़ल: कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

काव्य डेस्क

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                                                    कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं
ये किस के हाथ से दामन छुड़ा रहा हूँ मैं

तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं

ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह
तुम्ह...और पढ़ें
1 day ago

अनुप्रिया की कविता- जब होती हूँ पंख उड़ जाते हो थामकर मुझे

काव्य डेस्क

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                                                    जब होती हूँ
पंख
उड़ जाते हो थामकर मुझे
नीले विस्तार में
जब
होती हूँ ख़्वाब
भर लेते हो अपनी आँखों में
जब
होती हूँ बूँद
सागर बन समेट लेते हो
अपने आग़ोश में
जब
होती हूँ...और पढ़ें
1 day ago

फ़रीहा नक़वी: हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं

काव्य डेस्क

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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
इक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक-एण्ड-वाइट हैं तो फिर इन में क्यूँ
रंग-बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं

ख़्वाबों की मिट्टी से बने दो कूज़ों में
...और पढ़ें
1 day ago

राजेन्द्र कृष्ण: किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाए हुए

काव्य डेस्क

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किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाए हुए
ज़माना गुज़रा है अपना ख़याल आए हुए

बड़ी अजीब ख़ुशी है ग़म-ए-मोहब्बत भी
हँसी लबों पे मगर दिल पे चोट खाए हुए

हज़ार पर्दे हों पहरे हों या हों दीवारें
रहें...और पढ़ें
1 day ago
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