'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अंतस्तल, जिसका अर्थ है- हृदय या मन। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- मुखरित मेरे आँसू का स्वर
अरे है वह अंतस्तल कहाँ?
अपने जीवन का शुभ-सुन्दर
बाँटा करता ह...और पढ़ें
हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है - महत जिसका अर्थ है महान; सर्वश्रेष्ठ। कवि सुमित्रानंदन पंत ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
[अपनी कॉटेज के प्रति]
मेरे निकुंज, नक्षत्र वास!
इस छाया मर्मर...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- यती, जिसका अर्थ है- रोक, रुकावट, मनोविकार। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- जैसे तुझे स्वीकार हो !
जैसे तुझे स्वीकार हो !
डोलती डाली, प्रकम्पित पात, पाटल-स्तम्भ विलुलित,
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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निदान, जिसका अर्थ है- आदि कारण या मूल कारण। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- जो न होना था हुआ
जो न होना था, हुआ;
हुआ जो यह हुआ-
अनजाना हुआ।
अब जो...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अजेय, जिसका अर्थ है- जिसे कोई जीत न सके, अपराजेय। प्रस्तुत है वीरेनद्र वत्स की कविता- प्रचंड अग्निज्वाल हो
प्रचंड अग्निज्वाल हो
अपार शैलमाल हो
तू डर नहीं सिहर नहीं...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- गत्वर, जिसका अर्थ है- जानेवाला, क्षणिक, नाशवान्। प्रस्तुत है रामधारी सिंह "दिनकर" की रचना- मनुष्य और सर्प
चल रहा महाभारत का रण, जल रहा धरित्री का सुहाग,
फट कुरुक्षेत्र में ख...और पढ़ें
परंपरा और विद्रोह, जीवन में दोनों का स्थान है। परंपरा घेरा डालकर पानी को गहरा बनाती है। विद्रोह घेरों को तोड़कर पानी को चोड़ाई में ले जाता है। परंपरा रोकती है, विद्रोह आगे बढ़ना चाहता है। इस संघर्ष के बाद जो प्रगति होती है, वही समाज की असली प्रगति है...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विदारित, जिसका अर्थ है- विर्दीण किया हुआ, फाड़ा हुआ। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- झरना
मधुर हैं स्रोत मधुर हैं लहरी
न हैं उत्पात, छटा हैं छहरी
मनोहर झरना।
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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - निर्विष जिसका अर्थ है - विषरहित। कवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
कल कहा एक साथी ने, तुम बर्बाद हुए,
ऐसे भी अपना भरम गँवाया जाता है?
जिस दर्...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- कलानिधि, जिसका अर्थ है- चन्द्रमा, कलाकार। प्रस्तुत है महेन्द्र भटनागर की कविता- मोहक सपनों की छाया है !
रे मूक कलानिधि के मुख पर
मोहक सपनों की छाया है !
दिन म...और पढ़ें