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मगर यूं ही, ना बनकर खार जिया जाये।।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये कौन कहता है , कि प्यार किया जाये।
        
                                                    
                            
मगर यूं ही, ना बनकर खार जिया जाये।।

ख़ामोशी की चादर में, यूं लिपट जाते हैं।
हर हाल में , अपने लबों को सिया जाये।।
-यूनुस खान
23 घंटे पहले
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