ये कौन कहता है , कि प्यार किया जाये।
मगर यूं ही, ना बनकर खार जिया जाये।।
ख़ामोशी की चादर में, यूं लिपट जाते हैं।
हर हाल में , अपने लबों को सिया जाये।।
-यूनुस खान
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