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ज़िंदगी जीने में कहाँ कोई कठिनाई होगी,

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी जीने में कहाँ कोई कठिनाई होगी,
        
                                                    
                            
मुस्कुराने में कहाँ कोई बुराई होगी।

जो हक़ीक़त-ए-ज़िंदगी से वाक़िफ़ हो गया,
उसकी फिर किसी से न कोई फ़रमाइश होगी।

ख़्वाहिशों का शोर भी ख़ामोश पड़ जाएगा,
जब क़िस्मत से दिल की सुलह-सफ़ाई होगी।

अपने हिस्से की धूप भी कब तक सताएगी,
सब्र की छाँव मिले तो रौशनाई होगी।

जो ख़ुद अपनी ज़ात में मुकम्मल हो जाए,
उसकी हर साँस ही सबसे बड़ी कमाई होगी।
-साक्षी यादव
2 महीने पहले
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