आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज़िंदगी जीने में कहाँ कोई कठिनाई होगी,

                
                                                         
                            ज़िंदगी जीने में कहाँ कोई कठिनाई होगी,
                                                                 
                            
मुस्कुराने में कहाँ कोई बुराई होगी।

जो हक़ीक़त-ए-ज़िंदगी से वाक़िफ़ हो गया,
उसकी फिर किसी से न कोई फ़रमाइश होगी।

ख़्वाहिशों का शोर भी ख़ामोश पड़ जाएगा,
जब क़िस्मत से दिल की सुलह-सफ़ाई होगी।

अपने हिस्से की धूप भी कब तक सताएगी,
सब्र की छाँव मिले तो रौशनाई होगी।

जो ख़ुद अपनी ज़ात में मुकम्मल हो जाए,
उसकी हर साँस ही सबसे बड़ी कमाई होगी।
-साक्षी यादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर