विज्ञापन

मैं फूल बनकर रह गया

Thalaivaa Akshat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कांटो की गलियों में मैं फूल बनके रह गया,
        
                                                    
                            
टूटा मैं इस कदर की मजबूर बनकर रह गया l

मिलती नहीं है कहीं भी मेरे दर्दे दिल की दवा,
मेरा हर एक जख्म अब नासूर बनकर रह गया l

मेरे अपने ही कहते हैं पागल मुझको,
जमाने के खातिर मैं फिजूल बनकर रह गया l
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all