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समझदारी

Tasleem Haider

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मनमानियां बहुत की थी बचपन में
        
                                                    
                            
अब जिम्मेदारी उठाने का वक्त आया है
अपने सपनों से जो वादे किए थे
उन्हें निभाने का वक्त आया है
नहीं पड़ना मुझे इस ज़माने के फसाने में
अब समझदारी दिखाने का वक्त आया है
से फ़िक्र थे जब पापा की उंगली थाम कर चलते थे
अब अपने पैरों पर खड़े होकर चलने का वक्त आया है
10 घंटे पहले
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