विज्ञापन

लिखना चाहता हूं मैं सामने तुम रहो

Sumit Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखना चाहता हूं मैं सामने तुम रहो
        
                                                    
                            
लिखना चाहता हूं मैं सामने तुम रहो
कहने वाले हजारों मिलेंगे प्रिये
चाहने वाले न दिल से मिलेंगेंतुम्हें
दिल से चाहता हूं मैं मिल सको तो मिलो !!१

एक व्यथा को हृदय में बसा के चला
कहना चाहता हूं मैं उसव्यथा को तुम्हें
जिस व्यथा की दवातुम ही हो हे!प्रिये
कहना चाहता हूं मैं कुछ तुम्हें तुम सुनो!!२

चंद्र सी चांदनी कमल सी पंखुड़ी
स्वर्ग सी अप्सरा हो धरा में प्रिये||
मेघमाला से केश तुम्हारें प्रिये
प्रेम वर्षा कभी तो कराओं प्रिये||२
-सुमित जोशी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile