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वहतन ए अज़ीज़

shabbir ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फूलों की दुकां खोलिए बाज़ार में कोई
        
                                                    
                            
खुश्बू का या तो कोई व्यापार कीजिए
ला कर हर एक शख्स़ को उल्फत की राह पर
वतन ए अज़ीज़ को मेरे गुलज़ार कीजिए
-शब्बीर अज़हर लहरपुरी
2 महीने पहले
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