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वहतन ए अज़ीज़

                
                                                         
                            फूलों की दुकां खोलिए बाज़ार में कोई
                                                                 
                            
खुश्बू का या तो कोई व्यापार कीजिए
ला कर हर एक शख्स़ को उल्फत की राह पर
वतन ए अज़ीज़ को मेरे गुलज़ार कीजिए
-शब्बीर अज़हर लहरपुरी
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2 महीने पहले

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