जीवन में और भी हैं काम करने को,
हम पैदा नहीं हुए सिर्फ़ नाम करने को।
ताल्लुक़ है आपसे तो फ़िक्र है आपकी,
वरना कौन बैठा है यूँ सलाम करने को।
हर शख़्स यहाँ अपनी कहानी में उलझा है,
किसके पास वक़्त है किसी को बदनाम करने को।
कुछ रिश्ते किसी गरज़ के मोहताज नहीं होते,
दिल ही काफ़ी है कोई रिश्ता तमाम करने को।
हमने तो मोहब्बत को इबादत ही समझा था,
तुमने ही रख दिया हमें इल्ज़ाम करने को।
मंज़िल भी मिलेगी, कभी पहचान भी होगी,
बस वक़्त तो दो ख़ुद को मुक़ाम करने को।
मक़सद तो हमारा भी बड़ा है इस जहाँ में,
हम आए नहीं हैं सिर्फ़ आराम करने को।