विज्ञापन

मेरा हाल है पूछेगी।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या लगता है तुमको दुनियाँ मेरा हाल है पूछेगी।।
        
                                                    
                            
अश्क़ भरी ये आँखें ही बस मेरा हाल है पूछेगी।।
अगर देख लूँ आईना तो कोई नज़र नहीं आता हैं,,
नज़र हटेगी जब नज़रों से वो मेरा हाल है पूछेगी।।
पत्थर सी आँखें हो गई जब क्या राज़ छुपाएगी,,
आती जाती ऋतुओं से अब मेरा हाल है पूछेगी।।
दूर कहीं कोई चराग़ जल रहा तभी तो रौशन हैं,,
आंखों की बहती स्याही क्या मेरा हाल है पूछेगी।।
इश्क़ अगर आसां होता तो हर कोई ना कर लेता,,
मंदिर में बैठी मूरत ही अब मेरा हाल है पूछेगी।।
चलो चले अब वक़्त हुआ है दुनियाँ से जाने का,,
मेरे बाद तो नई पीढ़ी ही अब मेरा हाल है पूछेगी।।
गुस्ताख़ी क्या होती इश्क़ में ये मुझसे पूछो देव,,
लहद की मिट्टी ही रब से अब मेरा हाल है पूछेगी।।
-सुनील देव
4 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13066 कविताएं

View Profile