क्या लगता है तुमको दुनियाँ मेरा हाल है पूछेगी।।
अश्क़ भरी ये आँखें ही बस मेरा हाल है पूछेगी।।
अगर देख लूँ आईना तो कोई नज़र नहीं आता हैं,,
नज़र हटेगी जब नज़रों से वो मेरा हाल है पूछेगी।।
पत्थर सी आँखें हो गई जब क्या राज़ छुपाएगी,,
आती जाती ऋतुओं से अब मेरा हाल है पूछेगी।।
दूर कहीं कोई चराग़ जल रहा तभी तो रौशन हैं,,
आंखों की बहती स्याही क्या मेरा हाल है पूछेगी।।
इश्क़ अगर आसां होता तो हर कोई ना कर लेता,,
मंदिर में बैठी मूरत ही अब मेरा हाल है पूछेगी।।
चलो चले अब वक़्त हुआ है दुनियाँ से जाने का,,
मेरे बाद तो नई पीढ़ी ही अब मेरा हाल है पूछेगी।।
गुस्ताख़ी क्या होती इश्क़ में ये मुझसे पूछो देव,,
लहद की मिट्टी ही रब से अब मेरा हाल है पूछेगी।।
-सुनील देव
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