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आब बरसाने लगा है

SADDAM HUSSAIN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गयी कहां धूप, बादल छुपाने लगा है।
        
                                                    
                            
रवि तेरा रूप , आहिस्ता चुराने लगा है।
कौन घड़ा मेघ का, फोड़ की है शरारत
करके मुंह मेरा चुप, आब बरसाने लगा है।।

~सद्दाम हुसैन
6 दिन पहले
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Anil Pandey

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