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अच्छा नही लगता

Sachin Nigam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हकीकत मे सपना अपना
        
                                                    
                            
अच्छा नही लगता
बिन उत्सव खुद को सजाना
अच्छा नही लगता

छा जाएं चेहरे पे रौनक
यूं ही तो बात है
से वजह मुस्कुराना
अच्छा नही लगता

लड़खड़ाते है कदम
तो परवान चढ़ती है मयकशी
दिल मे ना हो गम तो मयखाना
अच्छा नही लगता

बात मे हो दम
तो असरदार होती है
ना समझे ये जमाना तो समझाना
अच्छा नही लगता

छुपा तो ले एक और राज
अपने सीने मे
कमबख़्त आखे बोलती है
तो छुपाना अच्छा नही लगता,
-सचिन निगम
 
3 महीने पहले
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