हकीकत मे सपना अपना
अच्छा नही लगता
बिन उत्सव खुद को सजाना
अच्छा नही लगता
छा जाएं चेहरे पे रौनक
यूं ही तो बात है
से वजह मुस्कुराना
अच्छा नही लगता
लड़खड़ाते है कदम
तो परवान चढ़ती है मयकशी
दिल मे ना हो गम तो मयखाना
अच्छा नही लगता
बात मे हो दम
तो असरदार होती है
ना समझे ये जमाना तो समझाना
अच्छा नही लगता
छुपा तो ले एक और राज
अपने सीने मे
कमबख़्त आखे बोलती है
तो छुपाना अच्छा नही लगता,
-सचिन निगम
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