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है वो तिनका, जिसे ढूँढा सारा जहाँ

Riya Prabhakar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है वो तिनका, जिसे ढूँढा सारा जहाँ,
        
                                                    
                            
मिला न कोई तिनका, जिसका इशारा मिला।
गैरत हैं सब, बस तेरी याद है,
गिला नहीं कि याद हो तुम मुझको,
शिकवा है कि भूल न पाया तुमको।
बस गिरकर संभलता रहा मैं,
तेरी इस डगर पर
बहुत ढूँढता रहा मैं।
अब तो सब्र-हिम्मत नहीं,
बस ज़ंजीर-सी बची है,
जो बाँधे हुए है मुझे।
2 दिन पहले
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