विज्ञापन

मुक्तक विन्यास में तेवरी

Ramesh Raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उनको बादाम-मुनक्के हैं
        
                                                    
                            
इत भूख गरीबी धक्के हैं |
हम रोजगार को भटक रहे
उत इंतजाम सब पक्के हैं ||

दर्दों के नैन-मटक्के हैं
सुख गुमसुम हक्के-बक्के हैं |
जनता तो ज़ीरो पर आउट
महंगाई के अब छक्के हैं ||

उत मस्ती धूम-धड्क्के हैं
इत जमे खून के थक्के हैं |
नित धर्म-धर्म वे चीख रहे
सब देख उन्हें भौचक्के हैं ||
-रमेशराज
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all