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कर्म का नसीब

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगाते रहिये नऐ-नऐ पौधे रोज़,
        
                                                    
                            
फल भी आऐंगे,
अपने लगे बाग़ की फसल पीछे,
अपने ही खाऐंगे,
क़दमों और दिमाग़ का हरकत में रखना है ज़रुरी,
कर्म का मुलाज़िम है नसीब सदा,
अदब में झुका पाऐंगे.

 
3 महीने पहले
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