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फिर एक बार

raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात अभी बाकी बहुत है,
        
                                                    
                            
आधी गुजरी है आधी अधूरी है
अधूरी रात को पूरा होने से पहले
तू जरा सोच ले तेरे जो करम है
यह कल वापस तुझ पर ही नहीं आ जाएं जरा सोच ले
सोचने के लिए रुक जा कहीं रास्ते में
इंतजार कर नयी सुबह का
देता तो दाता है तो उस विधाता का नेक बंदा तो बन
मिटकर मिट्टी में मिल जाएगा
दुनिया से चला जाएगा
क्या नाम कमाया तुने
तू दाता का नाम खराब कर जाएगा
तूने पैसा तो कमाया है पर नाम नहीं कमाया
बिन मेहनत के मिला, हराम का मिला कैसे पचा पाएगा
भीख मांगना था तो अदब से मांगता
तेरे हलक से कैसे यह निवाला अंदर चला जाएगा
आज कर ले विचार रात को सवेरे में बदलने से पहले
काम कुछ अच्छे ऐसे कर ले तो फिर से इंसान बन जाएगा
अभी रात का अंतिम पहर गुजरने को है
सवेरा होने को है सोच ले
फिर से एक बार...........।
-'राज '
3 महीने पहले
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