हाथ में प्रवेश पत्र
साथ में एक लिफाफा ,
जिसमे पेन - पेंसिल और जरूरत का सामान
कभी किसी बच्चे को पेपर देने जाते देखा है।
घर में चारो तरफ अफरा - तफ़री
कही कुछ छूट न जाए,
जिससे पेपर देते समय बच्चा जरा भी न घबराए।
साथ में मां की दुआएं,पिता की उम्मीदें
और अपने सपनों का आसमान होता है।
एक उत्तर पुस्तिका पर कई रिश्तों का विश्वास होता है
हर शब्द के साथ उसका अपनी तकदीर से संवाद होता है।
उसे मालूम है कि उसका सफल होना कितना जरूरी है
पिता ने जाने कैसे कॉलेज और कोचिंग की फीस भरी है।
वह जानता है कि गिरवी खेत को छुड़ाना है
बैंक से जो लोन लिया वो भी तो चुकाना है।
वह चुप रहता है पर भीतर जाने कितने तूफान चलते हैं
कही कुछ भूल न जाए यह सोचकर हाथ कांपते हैं।
मां बाप की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहता है
बहन की शादी और भाई की पढ़ाई में मदद करना चाहता है।
डर को पीछे छोड़ हिम्मत की कलम बनाता है
उत्तर पुस्तिका को अपनी तकदीर समझ शब्दों के रंग सजाता है ।
क्योंकि परीक्षा केवल प्रश्नों की नही होती
हौसलों, धैर्य और विश्वास की भी होती है।
जब बच्चा सफल होकर कुछ बनता है
तो जीत एक परिवार की नही पूरे समाज की होती है।
क्योंकि समाज है तो देश है
और देश है तो हम है ।