तुम्हारा दिल जो कभी फिर किसी पे आए,
मैं वो शख़्स हूं जो इसे कभी तोड़ कर नहीं जाऊंगा।
मैं तुमसे तुम्हारा गुज़रा हुआ कल नहीं पूछूंगा,
तुम्हारे ज़ख़्मों की तारीख़ नहीं पूछूंगा,
जो दर्द तुमने चुप रहकर सहे हैं,
उनका हिसाब भी नहीं मांगूँगा।
तुम्हें जितना कहना हो, कह देना,
जितना छुपाना हो, छुपा लेना,
मैं तुम्हारी ख़ामोशी को भी
तुम्हारे ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं करूंगा।
मुझे मालूम है,
टूटा हुआ भरोसा
फिर से आवाज़ नहीं करता,
बहुत धीरे-धीरे लौटता है—
किसी कांपते हुए बच्चे की तरह।
इसलिए मैं तुम्हारे क़रीब
जल्दबाज़ी में नहीं आऊंगा,
पहले तुम्हें यक़ीन दिलाऊंगा
कि मेरे हाथों में
तुम्हारा दिल महफ़ूज़ है।
तुम्हें अगर डर लगे
कि मोहब्बत फिर दर्द देगी,
तो मैं मोहब्बत की दुहाई लेकर
तुम्हें नहीं सताऊंगा।
बस तुम्हारे पास बैठकर
इतना कहूंगा—
“डरना मत,
इस बार तुम्हें अकेले नहीं लड़ना है।”
मैं तुम्हारी हँसी को
अपना हक़ नहीं समझूंगा,
तुम्हारे वक़्त पर
अपना अधिकार नहीं जताऊंगा,
तुम्हारी “ना” को
कभी अपनी बेइज़्ज़ती नहीं मानूंगा।
तुम मेरे साथ चलो
तो तुम्हारी मर्ज़ी से,
मेरा हाथ थामो
तो अपनी ख़ुशी से,
और कभी छोड़ना चाहो
तो मैं रास्ता रोकूंगा नहीं।
क्योंकि प्यार शायद
किसी को अपना बना लेना नहीं,
बल्कि इतना भरोसा बन जाना है
कि सामने वाला
अपने डर के बावजूद
तुम्हारे पास लौट सके।
और अगर कभी
तुम्हारा दिल फिर से
किसी के नाम धड़कने लगे,
तो मैं चाहूंगा
वो नाम मेरा हो—
मगर उससे भी पहले
मैं ये चाहूंगा
कि तुम्हारा दिल
फिर कभी न टूटे।
तुम्हारा दिल जो कभी फिर किसी पे आए,
मैं वो शख़्स बनूंगा जो उसे टूटने न दे।
और अगर वो ख़ुशक़िस्मती
मेरे नाम लिखी हुई हो,
तो मैं तुम्हें पाने से ज़्यादा
तुम्हें संभालने की कोशिश करूंगा।
शाम की चाय पर, तुम हंसना साथ में
मैं तुम्हारे गालों के डिम्पल देखूं
तुम्हारे माथे की बिंदी सिंपल देखूं
तुम चाय फूंकना, मै घूंट भरा करूंगा