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तुम्हारा दिल जो कभी

Prince Avinash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारा दिल जो कभी फिर किसी पे आए,
        
                                                    
                            
‎मैं वो शख़्स हूं जो इसे कभी तोड़ कर नहीं जाऊंगा।

‎मैं तुमसे तुम्हारा गुज़रा हुआ कल नहीं पूछूंगा,
‎तुम्हारे ज़ख़्मों की तारीख़ नहीं पूछूंगा,
‎जो दर्द तुमने चुप रहकर सहे हैं,
‎उनका हिसाब भी नहीं मांगूँगा।

‎तुम्हें जितना कहना हो, कह देना,
‎जितना छुपाना हो, छुपा लेना,
‎मैं तुम्हारी ख़ामोशी को भी
‎तुम्हारे ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं करूंगा।

‎मुझे मालूम है,
‎टूटा हुआ भरोसा
‎फिर से आवाज़ नहीं करता,
‎बहुत धीरे-धीरे लौटता है—
‎किसी कांपते हुए बच्चे की तरह।

‎इसलिए मैं तुम्हारे क़रीब
‎जल्दबाज़ी में नहीं आऊंगा,
‎पहले तुम्हें यक़ीन दिलाऊंगा
‎कि मेरे हाथों में
‎तुम्हारा दिल महफ़ूज़ है।

‎तुम्हें अगर डर लगे
‎कि मोहब्बत फिर दर्द देगी,
‎तो मैं मोहब्बत की दुहाई लेकर
‎तुम्हें नहीं सताऊंगा।

‎बस तुम्हारे पास बैठकर
‎इतना कहूंगा—
‎“डरना मत,
‎इस बार तुम्हें अकेले नहीं लड़ना है।”

‎मैं तुम्हारी हँसी को
‎अपना हक़ नहीं समझूंगा,
‎तुम्हारे वक़्त पर
‎अपना अधिकार नहीं जताऊंगा,
‎तुम्हारी “ना” को
‎कभी अपनी बेइज़्ज़ती नहीं मानूंगा।

‎तुम मेरे साथ चलो
‎तो तुम्हारी मर्ज़ी से,
‎मेरा हाथ थामो
‎तो अपनी ख़ुशी से,
‎और कभी छोड़ना चाहो
‎तो मैं रास्ता रोकूंगा नहीं।

‎क्योंकि प्यार शायद
‎किसी को अपना बना लेना नहीं,
‎बल्कि इतना भरोसा बन जाना है
‎कि सामने वाला
‎अपने डर के बावजूद
‎तुम्हारे पास लौट सके।

‎और अगर कभी
‎तुम्हारा दिल फिर से
‎किसी के नाम धड़कने लगे,
‎तो मैं चाहूंगा
‎वो नाम मेरा हो—

‎मगर उससे भी पहले
‎मैं ये चाहूंगा
‎कि तुम्हारा दिल
‎फिर कभी न टूटे।

‎तुम्हारा दिल जो कभी फिर किसी पे आए,
‎मैं वो शख़्स बनूंगा जो उसे टूटने न दे।

‎और अगर वो ख़ुशक़िस्मती
‎मेरे नाम लिखी हुई हो,
‎तो मैं तुम्हें पाने से ज़्यादा
‎तुम्हें संभालने की कोशिश करूंगा।

‎शाम की चाय पर, तुम हंसना साथ में
‎मैं तुम्हारे गालों के डिम्पल देखूं
‎तुम्हारे माथे की बिंदी सिंपल देखूं
‎तुम चाय फूंकना, मै घूंट भरा करूंगा
8 घंटे पहले
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