बना के बहाने क्या सोच के फासला मुझसे बढ़ाने लगे जान कर अंदाज़ आपका होकर मायूस दर्द बढ़ाने लगे है
किया जो इक फैसला खिलाफ मेरे सह कर जीना पड़ेगा रोने से होगा कुछ भी नहीं दिया आस का बुझाने लगे हैं
झूठी शोहरत बढ़ाने वास्ते किया है ऐसा आपने हम बदनसीबों के दर्द की दवा नहीं सोच कर बर्बाद होने लगे है
होकर मायूस तेरी बेरुखी से बेचैन तमन्नाओं से बहलाना पड़ा है दिल हमें थाम कर दिल दर्द तुम्हें सुनाने लगे हैं
मिलती कहां चैन ओ सकूं किसी को इतनी आसानी से जला के आस का दिया बार बार याद तुम्हे करने लगे हैं