विज्ञापन

तराना ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बना के बहाने क्या सोच के फासला मुझसे बढ़ाने लगे जान कर अंदाज़ आपका होकर मायूस दर्द बढ़ाने लगे है
        
                                                    
                            
किया जो इक फैसला खिलाफ मेरे सह कर जीना पड़ेगा रोने से होगा कुछ भी नहीं दिया आस का बुझाने लगे हैं
झूठी शोहरत बढ़ाने वास्ते किया है ऐसा आपने हम बदनसीबों के दर्द की दवा नहीं सोच कर बर्बाद होने लगे है
होकर मायूस तेरी बेरुखी से बेचैन तमन्नाओं से बहलाना पड़ा है दिल हमें थाम कर दिल दर्द तुम्हें सुनाने लगे हैं
मिलती कहां चैन ओ सकूं किसी को इतनी आसानी से जला के आस का दिया बार बार याद तुम्हे करने लगे हैं
6 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all