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फसाना ए दिल ए नादां

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे ग़ज़लों हमारे शेरों में तुमको सिर्फ आह ही आह मिलेगी लूटे गए हम जहां कहीं वहां सिर्फ ज़ख्म मिलेगी
        
                                                    
                            
ये सोच कर अब अपना कदम बढ़ाते हैं गर कभी बहार खिल उठे हमें तो फिर से कभी तो नई ज़िन्दगी मिलेगी
हमें सता के जो है शर्मिंदा किसी के दिल में वो शायद रह पाएं हमें सता के जो खुश सजा उसे लाज की मिलेगी
नहीं जिसे इंसानियत की खुशबू का पता है वो कहने लगे करोगे नेकी जितनी तुम उतनी ही कभी बरक्कत मिलेगी
ऐ नादान ए दिल मेरा क्यूं दिल तोड़ रहे हो ये जान कर नकाब जब भी उठेगा देखने को अदा मोहब्बत की मिलेगी
4 दिन पहले
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samarth dalela

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