हमारे ग़ज़लों हमारे शेरों में तुमको सिर्फ आह ही आह मिलेगी लूटे गए हम जहां कहीं वहां सिर्फ ज़ख्म मिलेगी
ये सोच कर अब अपना कदम बढ़ाते हैं गर कभी बहार खिल उठे हमें तो फिर से कभी तो नई ज़िन्दगी मिलेगी
हमें सता के जो है शर्मिंदा किसी के दिल में वो शायद रह पाएं हमें सता के जो खुश सजा उसे लाज की मिलेगी
नहीं जिसे इंसानियत की खुशबू का पता है वो कहने लगे करोगे नेकी जितनी तुम उतनी ही कभी बरक्कत मिलेगी
ऐ नादान ए दिल मेरा क्यूं दिल तोड़ रहे हो ये जान कर नकाब जब भी उठेगा देखने को अदा मोहब्बत की मिलेगी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X