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इश्क़ कल फूल से

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क कर फूल से, काँटा चुभा है आँखों में
        
                                                    
                            
जो नहीं मेरा, वो चेहरा बसा है आँखों में

सीपी में आ गिरा आँसू वो ज़हन से मेरे
यादों का बन के गुहर वो रहा है आँखों में

टीस सी उठती है जब याद हमें आती है
हँस के आँसू  छुपा हमने लिया है आँखों में

दर्द अपना किसी को हम भी बताएँ कैसे
इक समुंदर की तरह ही रखा है आँखों में

करवटें हम तो बदलते रहे हैं सारी रात
दर्द का कौन सा गुल ये खिला है आँखों में
1 सप्ताह पहले
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Sanjai kumar

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