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इश्क़ कल फूल से

                
                                                         
                            इश्क कर फूल से, काँटा चुभा है आँखों में
                                                                 
                            
जो नहीं मेरा, वो चेहरा बसा है आँखों में

सीपी में आ गिरा आँसू वो ज़हन से मेरे
यादों का बन के गुहर वो रहा है आँखों में

टीस सी उठती है जब याद हमें आती है
हँस के आँसू  छुपा हमने लिया है आँखों में

दर्द अपना किसी को हम भी बताएँ कैसे
इक समुंदर की तरह ही रखा है आँखों में

करवटें हम तो बदलते रहे हैं सारी रात
दर्द का कौन सा गुल ये खिला है आँखों में
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2 दिन पहले

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