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जीवन का असमंजस

Nidhi Rathore

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अर्ज किया है कि
        
                                                    
                            
कड़वा है पर सत्य है
अपना हो या पराया
लोग अपने सुख दुख एक दूसरे से बांटा करते है
और बाद में स्वयं के सुख दुख के असमंजस में फँस जाया करते है
लेकिन सच तो यह है कि दूसरे आपसे घृणा नही केवल स्वयं से थोड़ा अधिक प्रेम करते है
जिस प्रकार चन्द्रमा केवल अंधेरे में ही चमकता है
उसी प्रकार यदि लोगों से प्रेम चाहिए तो सुख दुख से अधिक
दिल मे समर्पण का भाव रखना होगा
समर्पण करने के लिए उन सब की कठोरता को शिक्षक की भांति स्वीकार करना होगा
और हो अगर जीवन मे सुख से यदि प्रेम तो आपको अपना कोई लक्ष्य बनाना होगा
जिस तरह सुर्य को किसी का प्रकाश नही चाहिए
लक्ष्य साधने वाले को किसी का आदेश नही चाहिए
तपती गर्मी में मेहनत भला किसको अच्छी लगती है ,लोग आपकी तरक्की को ईर्ष्या की दृष्टि से देखेंगे
और आपके लक्ष्य की योजना जानकर लोग आपसे प्रतिस्पर्धा करेंगे
प्रतिस्पर्धा के लिए आत्मविश्वास चाहिए
और आत्मविश्वास तो वही जहाँ प्रेम या समर्पण का कोई स्थान नही
आप कुरुक्षेत्र के मैदान में खड़े है
यदि आपमें आत्मविश्वास है तो लोग सम्मान देंगे नही तो आपका अपमान करेंगे
जीवन की इस असमंजस से यदि आपको दूर रहना हो तो याद रखना
अगर हो लोगो के लिए बहुत प्रेम तो प्रेम न मिलने पर अपनी अच्छाइयों को मत त्यागना
अंधेरे की बुराई को टालने वाले चंद्रमा की तरह चमकते रहना
और जब लक्ष्य साधना हो तो सुर्य की भांति किसी का इंतजार मत करना
--निधि राठौड़
एक महीने पहले
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