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ढूँढने वालों को मिल गई मंज़िल

Naresh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत दिनों से सोया नहीं हूँ
        
                                                    
                            
समय तुम्हारी याद में गुजारा है

तुम किसी की मक़सद बन चुकी हो
महज़ मेरे पास सिर्फ़ तुम्हारी यादों का सहारा

दुआ करो कि आज की रात मुझे नींद आ जाए
मेरे होठों पर नाम बस तुम्हारा है

मैं अकेला अब बहुत दूर तक चल नहीं सकता
तुम अगर साथ दो तो आने वाला कल हमारा है

ढूँढने वालों को मिल गई मंज़िल
"नरेश" तो बस आवारा है
21 घंटे पहले
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