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ढूँढने वालों को मिल गई मंज़िल

                
                                                         
                            बहुत दिनों से सोया नहीं हूँ
                                                                 
                            
समय तुम्हारी याद में गुजारा है

तुम किसी की मक़सद बन चुकी हो
महज़ मेरे पास सिर्फ़ तुम्हारी यादों का सहारा

दुआ करो कि आज की रात मुझे नींद आ जाए
मेरे होठों पर नाम बस तुम्हारा है

मैं अकेला अब बहुत दूर तक चल नहीं सकता
तुम अगर साथ दो तो आने वाला कल हमारा है

ढूँढने वालों को मिल गई मंज़िल
"नरेश" तो बस आवारा है
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3 घंटे पहले

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