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बद मिजाज़ शहर

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस बद मिजाज़ शहर को jeene ka सलीक़ा नहीं आता
        
                                                    
                            
मुस्कुरा दे कोई एक चेहरा ज़िंदगी को ऐसा लतीफ़ा नहीं आता
भले तुम भी आज़मा लो अगर तुम्हें यकीन नहीं आता
शाम तक रौन्द देंगे गले मिलने की आदत तुम्हारी
बहुत ख़फ़ा सा है ये शहर , अपनापन इन्हें रास नहीं आता
1 सप्ताह पहले
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Pankaj Sharma

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