विज्ञापन

मैदानों मे सरपट दौड़े धूम मचाती छुक-छुक गाती बाल रेल हैं।

Manju Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ बच्चों मिलकर खेलें खेल,
        
                                                    
                            
मैं डिब्बा और तुम सब मिलकर बन जाओ रेल।
रेलगाड़ी, मालगाड़ी छोड़ मैं बैठूंगी बाल रेल मे,
जो रोकेंगा इसको ये पहुंचा देंगी उसको फौरन रेल मे।
बिना तेल, पेट्रोल के चलती अपनी ये गाड़ी हैं,
सड़क, पटरी पर नहीं!
मैदानों मे सरपट दौड़े धूम मचाती छुक-छुक गाती बाल रेल हैं।
बच्चे हीं बच्चे बस इसकी सवारी हैं,
अपनी ये गाड़ी सब गाड़ियों पर भारी है।
मैं हार्न बजाऊं..!
तुम-सब सीटी बजाओ,
स्टेशन-स्टेशन सबको पहुंचाओ।
बिना किराये के चलती अपनी ऐसी गाड़ी हैं,
एक-दूसरे को बांधने को हमने अम्मा की साड़ी फाड़ी हैं।
सब गाड़ियों मे अपनी गाड़ी भारी हैं,
क्यों कि..
बच्चे हीं बच्चे इसकी प्रिय सवारी हैं।
-मंजू मंजुला
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile