विज्ञापन

यादों की स्मृति

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यादें थीं
        
                                                    
                            
कुछ भूल गईं
कुछ भूले से
याद रहीं

सुख में
कभी दुख में
कुछ गूँज उठी
कुछ खामोश रहीं

भूलने के
कभी गूँजने के
क्रम में क्रमशः
झूलती रही जिंदगी।
-मं शर्मा
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile