यादें थीं
कुछ भूल गईं
कुछ भूले से
याद रहीं
सुख में
कभी दुख में
कुछ गूँज उठी
कुछ खामोश रहीं
भूलने के
कभी गूँजने के
क्रम में क्रमशः
झूलती रही जिंदगी।
-मं शर्मा
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