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आखिर कब तक हम यूं ही चुप रहे।

Kumari Priyanka

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आखिर कब तक हम अपनी भाषा को
        
                                                    
                            
सुधारते रहे।
कब तक अपने कपड़ो को
संभालते रहे।
कब तक तमाम पाबंदियों को
झेलते रहे।
कब तक ये करे,ये न करे - को
सुनते रहे।
आखिर कब तक हम अबला के
रूप को लेकर चले।
कब तक घुटते रहे,बंद रहे और कुछ
न कहे।
आखिर कब तक हम यूं ही
चुप रहे।
आखिर कब तक हम यूं ही चुप रहे।
और कितना सहे??
2 सप्ताह पहले
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