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अकेला न रहता इन अंधेरी राहों में

Jyoti Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसे वक्त में बस एक ही शख्स था ,
        
                                                    
                            
मां का नाम मेरे हर लफ्ज़ में था।
मेरा हर जख्म उसका जख्म था,
वो साया मेरा हर मरहम था।
कुदरत का लाख शुक्रिया होता,
गर मेरी माँ को अमर कर दिया होता।
अकेला न होता इन बफाओं में,
अकेला न रहता इन अंधेरी राहों में।
एक महीने पहले
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