विज्ञापन

उम्मीदे होती तो कैसे होती

Juli Panday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्मीदे होती तो कैसे होती,
        
                                                    
                            
इस दुनिया में तुमसे होती।

हार गए तुम्हारे इन उम्मीदों से,
और इन असमानो के तारो से।

गुलाब की पंखखुडिया गिरे जैसे गिरे
नजरे उम्मीदों से।

गर्मियों में बारिश होती तो कैसे होती,
उम्मीदे होती तो कैसे होती।

हम टूट के बिखर गए होते अगर
शायद उम्मीदें तुमसे ना होती।

गुजरे हुए पालो से उम्मीदें होती हैं,
उम्मदे होती तो कैसे होती।
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile