उम्मीदे होती तो कैसे होती,
इस दुनिया में तुमसे होती।
हार गए तुम्हारे इन उम्मीदों से,
और इन असमानो के तारो से।
गुलाब की पंखखुडिया गिरे जैसे गिरे
नजरे उम्मीदों से।
गर्मियों में बारिश होती तो कैसे होती,
उम्मीदे होती तो कैसे होती।
हम टूट के बिखर गए होते अगर
शायद उम्मीदें तुमसे ना होती।
गुजरे हुए पालो से उम्मीदें होती हैं,
उम्मदे होती तो कैसे होती।
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