खुशियों का बहार लेकर आयी जब जिन्दगी,
अश्रु के कण भी साथ ले
आई जिन्दगी।
मंजिल पाने के लिए मेरे हम सफर ने सदा,
साथ निभाया और न अलहदा की जिन्दगी।
ईश की कृपा के लिए प्रार्थित है,
दुआ की अभिलाषा में बसर रही जिन्दगी।
दीन हीन हाथ फैलाये दिखते हर शहर,
ऐसे ही उनकी पसर रही जिन्दगी।
यहाँ न कोई जज़्बा न प्यार का नाम है,
बदलते वक्त की इसरार है जिन्दगी।
पाषाण हृदय में पनप न सके प्यार,
टूटे हुए हृदय की फलसफा है जिन्दगी।