आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जिन्दगी

                
                                                         
                            खुशियों का बहार लेकर आयी जब जिन्दगी,
                                                                 
                            
अश्रु के कण भी साथ ले
आई जिन्दगी।

मंजिल पाने के लिए मेरे हम सफर ने सदा,
साथ निभाया और न अलहदा की जिन्दगी।

ईश की कृपा के लिए प्रार्थित है,
दुआ की अभिलाषा में बसर रही जिन्दगी।

दीन हीन हाथ फैलाये दिखते हर शहर,
ऐसे ही उनकी पसर रही जिन्दगी।

यहाँ न कोई जज़्बा न प्यार का नाम है,
बदलते वक्त की इसरार है जिन्दगी।

पाषाण हृदय में पनप न सके प्यार,
टूटे हुए हृदय की फलसफा है जिन्दगी।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
46 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर