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मैंने छुआ है

Jagdish chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल किसने देखा? आज मैंने सम्मान छुआ है।
        
                                                    
                            
भूत-भविष्य छोड़ो, मैंने वर्तमान छुआ है।

मेहनत की भट्टी में तपा जब बाप।
तब मैंने सपनों का अरमान छुआ है।

उछाला बाप ने जब गोद से मुझे हवा में।
वापस गोद में आने तक आसमांन छुआ है।

भगवान दिखता कैसा है? देख नहीं पाया।
रोज छूकर माँ-बाप को, भगवान छुआ है।

लिखी पसीने की हर बूंद ने तकदीर।
मैंने हौसले से जीत का मैदान छुआ है।
... जगदीश चंद्र कापड़ी
2 महीने पहले
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