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लघुता बिसराय दियौ मन से यहु भाव विनाश करै नर का।

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लघुता बिसराय दियौ मन से यहु भाव विनाश करै नर का।
        
                                                    
                            
सब संतति हैं वहि ईश्वर की मन भाव नहीं भरिए डर का।
दुइ हाथ व पैर मिले हमको सबको तरना भव सागर का।
हर एक यहाँ पर भिन्न हवै मत शोक करो सरसों भर का।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
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