विज्ञापन

मुझको गुजरे हुए तो जमाने हुए

Gopinath Krishna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझको गुजरे हुए तो जमाने हुए ।
        
                                                    
                            
' मैं जिंदा था ' किस्सा पुराने हुए ।।

मुझको जिंदा समझना भूल थी तेरी ,
छोड़कर पिंजड़ा परिंदा बेगाने हुए ।

अरे, मौत से कम नहीं तन्हा रहना,
जीने की ख्वाहिश तेरी याराने हुए ।

सोचा न था , कभी तन्हा रहना होगा ,
मेरी तन्हाई अब इश्क़ के तराने हुए ।

जीना हराम किया था जिसने जिंदगी मेरी ,
वही जनाजे में आने को दीवाने हुए ।

थक गया हूँ जिंदा लाश को ढोते - ढोते ,
सुपूर्द - ए - खाक में मिलकर कृष्ण ' अफ़साने हुए ।
- गोपी नाथ कृष्ण
 
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile