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मिन्नते एक नहीं हज़ार मांगना है

Dr. Amar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिन्नते एक नहीं हज़ार मांगना है
        
                                                    
                            
सवेरा जब तक न हो तब तक जगाना है
यादों की रंजिश में आंखों को थका ढालों
फिर व्यथित होके थकी आंखों में नींद साधना है
तपतीश करो और सबूत भी लाओ मुकदमा चलाना है
वो तो कोतवाल साहब है तुम्हे खुद को चोर बताना है
हार विभोर कर रही मुझे , पर जीते हुए से हाथ मिलाना नहीं है
तुम यहां जीत गए बधाई हो तुम्हे
पर वहां अगर मैं जीता तो फिर अपराधी को बचाना नहीं हैं
 
2 महीने पहले
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