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मिन्नते एक नहीं हज़ार मांगना है

                
                                                         
                            मिन्नते एक नहीं हज़ार मांगना है
                                                                 
                            
सवेरा जब तक न हो तब तक जगाना है
यादों की रंजिश में आंखों को थका ढालों
फिर व्यथित होके थकी आंखों में नींद साधना है
तपतीश करो और सबूत भी लाओ मुकदमा चलाना है
वो तो कोतवाल साहब है तुम्हे खुद को चोर बताना है
हार विभोर कर रही मुझे , पर जीते हुए से हाथ मिलाना नहीं है
तुम यहां जीत गए बधाई हो तुम्हे
पर वहां अगर मैं जीता तो फिर अपराधी को बचाना नहीं हैं
 
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20 घंटे पहले

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