जितनी हसरतों से मैं तुम्हें देखता हूं,
उतनी हसरतों से तो तुम भी मुझे नहीं देखती हो,
बादलों का कसूर नहीं है कि वो बरस गए,
दिल हलका करने का शौक तो सबका होता है,